सौ में अस्सी अंधे अंधी आस्तिकता पर न्यौछावर अंधे , अंधों की बात मानते हैं चमत्कार पर विश्वास करते हैं लालच में भगवान को शमशान घाट में ढूंढते हैं और अंततः शैतान के भक्त हो जाते हैं…
आदमी आदमी को सीढ़ी बनाता है , चढ़ता है दूसरों को धक्का देकर आदमी सीढ़ी बनता है चढ़ाता है दूसरों को अपने को स्थापित करने के लिये आदमी चढ़ता है सीढ़ी पर गिरता है चढ़ता है खत्म…
लाभ की व्यवस्था में स्थान की व्यवस्था में या यूँ कहें युगों युगों से चली आ रही बनी बनायी व्यवस्था में लाभ के लिये स्थान खोजते आदमी या इसमें अपना स्थान बनाते आदमी बहुत सच , नहीं होते हैं…
जनता ठीक-ठीक अपने विश्वासों के आसपास होती है उसे विश्वास है ईश्वर सबका भला करता है उसे विश्वास है। यज्ञ और आहुतियों से विश्व का कल्याण होता है इसलिये वह इन सबके आसपास होती है उसे विश्…
हमारी बुनियादी व्यवस्था जिसमें हम जी रहे हैं उसमें कौन कितना क्रांतिकारी है बात तय होती है एक-दूसरे को कौन कितना धोखा दे सकता है। एक दूसरे का कौन कितना गला काट सकता है अफवाहों के बा…
शेर के गले में पड़ी तुलसी माला देखकर आश्चर्य चकित होते हैं हम दबे पाँव वह घात लगाकर पंजों के बल चलता है मन हमारा उसकी भर्त्सना करता है पर हम उसकी इज्जत करते हैं और उसके गले मे…
रोटी से जिनका कोई मतलब नहीं होता वे लड्डुओं से तौले जाते हैं सोने-चांदी से तौले जाते हैं फूलों से लादे जाते हैं वे सदियों के खानदानी छप्पन भोग वाले !
उनकी दुनिया का सर्वमान्य नियम है प्रतिस्पर्धा ! जिसमें उनकी सिर्फ संगठित पूँजी होती है चिन्तन बस उसी पर ! ज्यादा लाभ , ज्यादा शोषण ! उनकी इस दुनिया में चिड़िया के लिये कबूतर के …