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घोषणा

इतिहास समाप्ति की घोषणा   विचार समाप्ति की घोषणा   यानि जंगलराज की घोषणा !

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अधिनायक

अधिनायक तेरी जय हो देश की पूँजी देश में नहीं   देश का लाभ देश में नहीं   सात समुन्दर पार बैठे हे महा अधिनायक तेरी जय हो   जय हो , जय हो !

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सेवक

प्रशासन का एक अदना सा प्यादा मदमस्त होकर हाथी जैसा चलता है   अपने को भारी भरकम पहाड़ जैसा बाकी को तुच्छ समझता है   एक अदना सा प्यादा   शहर की कमजोर बांहों पर खूब नाचता है ।�����������������…

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अवसरवाद

जब पद का गुरूर शरीर में कहीं समाया हो   या भ्रष्ट अवसरों में   गले तक डूबा हुआ हो   साथ ही झूठे प्रसंशकों से   घिरा हुआ हो   वह आदमी अंधे की तरह होता है   या देखकर भी   नहीं देखता   रिमोट क…

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निष्फल

धन की पूजा   शक्ति की पूजा   हर मंदिर में होती है   यह सब हो निष्कंटक उनकी इसी कल्पना से   विनयशीलता सिर्फ कागज पर ही इठलाती है

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धार्मिकता

धार्मिक व्यक्ति , बहुत अच्छे होते हैं   बहुत अच्छी होती हैं   उनकी भावनाएं कोमल , लचीली , और निर्मल   बहुत खराब होते हैं उनके विचार उनकी सोच   उनकी सहिष्णुता जिसमें दूसरे धर्म का कोई व्यक्त…

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पहला झूठ

आमूलचूल परिवर्तन के लिए   संघर्ष का लंबा रास्ता जाता है   यह अलग बात है   कहीं व्यवस्था बनाए रखने के नाम पर कहीं तात्कालिकता के लाभ में   लोग परंपरागत हो जाते हैं   और पहला झूठ   संवेदनशील …

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डर

डर कुंडली मार कर जब बैठ जाये तब फुंफकारने लगता है साँप जैसा   डर जब पेट के अंदर सिकुड़ता है   तो सरपट भागता   खोजता सुरक्षित स्थान   कोई अंधेरी सुरंग   या बिल में घुस जाता है चूहे जैसा   डर…

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अस्थि कलश

मरी हुई पवित्र इच्छाओं का बोझ लेकर शामिल होना   जिन्दगी के अनुष्ठान में   संभालकर रखना उन्हें पुर्नजीवन की लालसा में पीढ़ी दर पीढ़ी हस्तांतरण   अस्थि कलश का ।

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झूठ

आत्महत्या कोई शौक से नहीं करता   मजबूरी होती है   मुक्ति के झूठे आकर्षण में   दीपक की लौ में खिंचते हैं पतंगे   वे दीपक से प्रेम करते हैं ऐसा कहना दुनिया का सबसे बड़ा झूठ है ।��������������…

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हादसा

पतंगे नहीं जानते पहचानते   रौशनी को स्वतंत्रता को मुक्ति को   खामोशी से दीपक में झुलसकर   सामूहिक आत्महत्या   करते हैं प्रेम से   यह दुनिया का   सबसे बड़ा हादसा है ।

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सन्नाटा

चांदनी रात में सूखी नदी के किनारे   उल्लूओं की दिल दहला देने वाली चीख अच्छी नहीं लगती है भूत-प्रेत के अस्तित्व में और भी डरावनी हो जाती है चांदनी रात भी काली बदलियों के ओट में छिप जाती है  …

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अंधी आस्तिकता

सौ में अस्सी अंधे अंधी आस्तिकता पर न्यौछावर   अंधे , अंधों की बात मानते हैं   चमत्कार पर विश्वास करते हैं   लालच में भगवान को शमशान घाट में ढूंढते हैं   और अंततः शैतान के भक्त हो जाते हैं��…

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भूल-भुलैया

आदमी आदमी को   सीढ़ी बनाता है , चढ़ता है दूसरों को धक्का देकर   आदमी सीढ़ी बनता है   चढ़ाता है दूसरों को   अपने को   स्थापित करने के लिये   आदमी चढ़ता है सीढ़ी पर   गिरता है चढ़ता है   खत्म…

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लाभ की व्यवस्था

लाभ की व्यवस्था में   स्थान की व्यवस्था में या यूँ कहें युगों युगों से चली आ रही बनी बनायी व्यवस्था में लाभ के लिये स्थान खोजते आदमी या इसमें अपना स्थान बनाते आदमी   बहुत सच , नहीं होते हैं…

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कवच

दुनिया में बहुत सी चीजें   एक साथ घटती हैं   जैसे कि-   आशाओं के साथ निराशाएँ   हमारी छोटी सी आशा भरी दुनिया में   हमारी अभावग्रस्त दुनिया में   छोटी-छोटी जरूरतों के बीच   हमारे साथ रहकर भी…

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अधीनता

बहुत ईमानदारी बहुत निष्ठा से जीता हुआ गरीब आदमी विश्वास कर लेता है उन सब पर   उनकी समस्त बुराईयों के साथ या यूँ कहें स्वीकार कर लेता है उनकी अधीनता ।

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अघोषित

गरीब अपराधी होते हैं   अमीर कोई अपराध नहीं करते   अमीर के अपराध   गरीब पर थोप दिये जायें   गरीब को कोई फर्क नहीं पड़ता   अमीर को पड़ता है   लिहाजा ! घोषित कर दिया जाये   गरीब ही अपराध करते …

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विश्वास-अंधविश्वास

जनता ठीक-ठीक अपने विश्वासों के आसपास होती है   उसे विश्वास है ईश्वर सबका भला करता है   उसे विश्वास है। यज्ञ और आहुतियों से विश्व का कल्याण होता है इसलिये वह इन सबके आसपास होती है   उसे विश्…

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चिंतन में

जनता के परम्परागत चिंतन में   स्मृतियों में संस्कृतियों में   परम्पराओं में अवधारणाओं में   मूल्यों में   साम्राज्यवादी सत्तायें   फासीवादी धर्मवादी   पूँजीवादी   जनता इन सबमें डूबकर सिर्फ …

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युग निर्माता

हमारी बुनियादी व्यवस्था जिसमें हम जी रहे हैं   उसमें कौन कितना क्रांतिकारी है   बात तय होती है एक-दूसरे को कौन कितना धोखा दे सकता है।   एक दूसरे का कौन कितना गला काट सकता है   अफवाहों के बा…

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शेर को धर्मात्मा की पदवी

शेर के गले में पड़ी   तुलसी माला देखकर   आश्चर्य चकित होते हैं हम   दबे पाँव वह घात लगाकर   पंजों के बल चलता है   मन हमारा उसकी भर्त्सना करता है   पर हम उसकी इज्जत करते हैं   और उसके गले मे…

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बेड़ियाँ

वे कोई सूरमा नहीं थे   ऐसा कहने के लिए   उनके पास कुछ था भी नहीं   उनके पास थे- ललचाने वाले दानों के कुछ चुग्गे   कुछ फन्दे कुछ हथकण्डें कुछ हथकड़ियाँ   कुछ अनर्थ वाले भय   इन्हीं को उन्हों…

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छप्पन भोग वाले

रोटी से जिनका कोई   मतलब नहीं होता   वे लड्डुओं से तौले जाते हैं   सोने-चांदी से तौले जाते हैं   फूलों से लादे जाते हैं   वे   सदियों के खानदानी   छप्पन भोग वाले !

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सवाल

सवाल यह नहीं   सवाल वह भी नहीं   सवाल है गरीबों के ही बल पर गरीबों से ही मिलकर गरीबों ही जैसे आचरण में रहते गरीबों के लिये ही काम कर   किस-किसने / नाम कमाया दुनिया बनाई   किस-किस ने ऐसा किय…

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प्रतिस्पर्धा

उनकी दुनिया का   सर्वमान्य नियम है   प्रतिस्पर्धा !   जिसमें उनकी सिर्फ   संगठित पूँजी होती है   चिन्तन बस उसी पर ! ज्यादा लाभ , ज्यादा शोषण !   उनकी इस दुनिया में चिड़िया के लिये कबूतर के …

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