उनकी
दुनिया का
सर्वमान्य
नियम है
प्रतिस्पर्धा
!
जिसमें
उनकी सिर्फ
संगठित
पूँजी होती है
चिन्तन
बस उसी पर !
ज्यादा लाभ, ज्यादा शोषण !
उनकी
इस दुनिया में
चिड़िया के लिये
कबूतर के लिये
आदमी
के लिये
कोई
जगह नहीं होती ।
ज्यादा लाभ, ज्यादा शोषण !
चिड़िया के लिये
कबूतर के लिये
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प्रतिस्पर्धा