प्रशासन का एक अदना सा प्यादा मदमस्त होकर हाथी जैसा चलता है अपने को भारी भरकम पहाड़ जैसा बाकी को तुच्छ समझता है एक अदना सा प्यादा शहर की कमजोर बांहों पर खूब नाचता है ।…
जब पद का गुरूर शरीर में कहीं समाया हो या भ्रष्ट अवसरों में गले तक डूबा हुआ हो साथ ही झूठे प्रसंशकों से घिरा हुआ हो वह आदमी अंधे की तरह होता है या देखकर भी नहीं देखता रिमोट क…