जब
पद का गुरूर
शरीर में कहीं समाया हो
या
भ्रष्ट अवसरों में
गले
तक डूबा हुआ हो
साथ
ही झूठे प्रसंशकों से
घिरा
हुआ हो
वह
आदमी
अंधे की तरह होता है
या
देखकर भी
नहीं
देखता
रिमोट
कंट्रोल से
चलता
है खिलौने की तरह
विवेक
सम्मत निर्णय उसके लिये
बहुत
मायने नहीं रखते
वह
सिर्फ अवसरों के लिये होता है
अवसर
वालों के साथ होता है
आदमी
के साथ तो कतई नहीं !
शरीर में कहीं समाया हो
अंधे की तरह होता है
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अवसरवाद