जिनकी
बाहों में
रात
की रंगरैलियों में
पूरा
शहर सिसकता रहा
जिनकी
प्लेटों में
शेर मांस तक
सजता रहा
जिनके
कटोरों में
सिर्फ
मदिरा का यौवन ही
छलकता
रहा
वे
ही
हमारी किस्मत लिखते रहे
बार-बार/
हर बार ।
शेर मांस तक
सजता रहा
हमारी किस्मत लिखते रहे
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