जनता
का असंतोष
राजा
के राज्य में
पानी
के बुलबुलों-सा
उठता...
फुस्स हो जाता
राजा
जनता को
स्वामी भक्ति सिखाता
उसकी
जड़ों में मठा डालता
जनता
से हाय-हलो, कैसे हो कहता
दारू
वालों को दारू
भीख
वालों को भीख
निकम्मे
ज्ञानवादियों को दान
अपने
सूबेदारों को
सूबे
दान में देता है
कभी-कभी
जरूरतमंदों को
सहयोग
करता चतुर ठग-सा
इस
तरह
जनता
की अकूत प्रतिरोध क्षमता को
अपने
बस्तों में लपेटकर रखता
राज
भक्ति में डूबी जनता
अपनी परिस्थितियों पर
चीखती
चिल्लाती रोती
जनता
का असंतोष हमेशा
राजभक्ति
में घुटने टेकता
बस्स
! चौराहों में बड़बड़ाता भर ।
स्वामी भक्ति सिखाता
अपनी परिस्थितियों पर
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