लोग
अपने कुनबों पर
थिरककर
नाचे थे
बात ठीक थी
लोग
अपने कस्बों पर
थिरककर नाचे थे
बात ठीक थी
लोग
अपनी
धरोहर संस्कृति पर
थिरककर नाचे थे
बात ठीक थी
परंतु
जब भी यह
लक्ष्य हुए सत्ता की ओर
नस्लवाद, जातिवाद
धर्मवाद के होकर
तब-तब अच्छा नहीं हुआ
अच्छा
नहीं हुआ
लेकिन बार-बार यही हुआ
सदियों से
आजमाये
गए ये तरीके
कभी
फेल नहीं हुए
राजा
की बोलो जय !
अपने कुनबों पर
बात ठीक थी
अपने कस्बों पर
थिरककर नाचे थे
बात ठीक थी
धरोहर संस्कृति पर
थिरककर नाचे थे
बात ठीक थी
लक्ष्य हुए सत्ता की ओर
नस्लवाद, जातिवाद
धर्मवाद के होकर
तब-तब अच्छा नहीं हुआ
लेकिन बार-बार यही हुआ
सदियों से
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अ-लक्ष्य