इश्तहार

 
राजा की
योजनाओं के आंकड़े 
झूठ के पुलिन्दें होते हैं
 
उसकी योजनाओं के लाभ
जरूरतमंदों में कम 
अपनों में ही रेवड़ी से बँटते हैं
 
उद्घोषक
उद्घोषणा करता है लगातार
 
राजा की बोलो 'जय
' !

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