राजा जी के घोड़े

राजा जी के घोड़े 
अस्तबल में रहते 
चना चबैना खाते
 
उनके पुट्ठों पर 
हाथ धरें तो हिनहिनाते 
पूंछ हिलाकर 
वे बड़े शौक से चरते 
लोगों की संवेदनायें 
हरी घास हो जैसे
 
अपने को समझते
कुछ अलग नस्ल के 
आहटों पर कान लगाये 
राजा जी उन पर करें सवारी 
चौकस तैयार खड़े रहते हरदम ।

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