राजमहल
के गलियारे
रौशन
रहते
सत्ता
के बिचौलियों से
वे
सत्ताधीशों के
आगे-पीछे
दांये-बांये
उनकी
पलकों में जगह बनाकर
उनकी
आँखों के तारे होकर
सत्ता
का करते व्यापार
ऐसे
में
सत्ता लोगों तक
पहुँचे
भी तो कैसे ?
सत्ता लोगों तक
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रौनकता