घट-घट में

राजा 

हमारे खान-पान में 

रहन-सहन में 

उठक में, बैठक में 

लिबास में, लहजे में 

आचार में, विचार में 

यहाँ तक 

हमारी साँसों में भी

 

वह हर जगह होता है 

परंतु दिखाई नहीं देता है

 

राजा 

अदृश्य है, निराकार है 

घट-घट में बसा है


एक टिप्पणी भेजें

और नया पुराने